हाथ से लिखी कॉपियाँ, मिनटों में चेक।
ClassPulse आपकी पूरी क्लास की उत्तर पुस्तिकाएँ सवाल-दर-सवाल चेक करता है। कॉपी जाँचने में जो घंटे जाते थे वे बचते हैं, और यह साफ़ दिखता है कि क्लास कहाँ अटक रही है।
काम कैसे होता है
- प्रश्न पत्र अपलोड कीजिए। अलग से आंसर की बनाने की ज़रूरत नहीं — मार्किंग स्कीम आपके अपने पेपर से ही बनती है।
- बच्चे अपनी कॉपी की फ़ोटो भेजते हैं। कुछ भी इंस्टॉल नहीं करना पड़ता, कोई भी फ़ोन चल जाता है। या स्टाफ़ एक साथ स्कैन कर दे।
- उसी दिन नंबर और फ़ीडबैक वापस। हर सवाल पर, हर बच्चे के लिए।
- आख़िरी फ़ैसला आपका। जब तक शिक्षक मंज़ूरी न दे, कोई नंबर बच्चे तक नहीं जाता।
हिंदी लिखावट भी पढ़ता है
देवनागरी में लिखे उत्तर सीधे पढ़े जाते हैं — अनुवाद करके अंदाज़ा नहीं लगाया जाता। और जैसे बच्चे असल में लिखते हैं, यानी हिंदी में समझाइश के बीच अंग्रेज़ी के तकनीकी शब्द, वह भी सामान्य बात है, कोई अपवाद नहीं।
नंबर कैसे दिए जाते हैं
- स्टेप मार्किंग। तरीक़ा सही और हिसाब में चूक — तो तरीक़े के नंबर मिलते हैं, जैसे बोर्ड का परीक्षक देता है।
- एरर कैरी फ़ॉरवर्ड। शुरू में एक ग़लत आँकड़ा आगे के सारे नंबर नहीं खाता।
- हर नंबर के पीछे सबूत। कॉपी की जो पंक्ति उस नंबर की वजह है, वही दिखाई जाती है — इसलिए पूरा पेपर पढ़ने में सेकंड लगते हैं।
- लेबल वाले चित्र पढ़े जाते हैं। बिना लेबल का फ़्रीहैंड चित्र एक ही चीज़ है जिस पर यह फ़ैसला नहीं करता — वह सवाल आपको लौटा दिया जाता है।
जो पढ़ा न जा सके, उस पर अंदाज़ा नहीं लगाया जाता। अगर कोई पन्ना धुंधला है या पढ़ने में नहीं आ रहा, तो सिस्टम बताता है कि कौन सा हिस्सा नहीं पढ़ा गया और वह सवाल शिक्षक के लिए छोड़ देता है। नंबर गढ़कर नहीं देता। यही सबसे ज़रूरी फ़र्क़ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हर टेस्ट के लिए आंसर की बनानी पड़ेगी?
नहीं। मार्किंग स्कीम आपके प्रश्न पत्र से ही बनती है — किस सवाल के कितने नंबर, और पूरे उत्तर में क्या-क्या होना चाहिए।
बच्चों की लिखावट ख़राब है, और फ़ोटो उससे भी ख़राब आएगी।
यह सिस्टम इसी तरह की कॉपियों पर बना है — साधारण लिखावट, फ़ोन से टेढ़ी-मेढ़ी ली गई फ़ोटो, परछाईं समेत। और जहाँ न पढ़ पाए, वहाँ साफ़ कह देता है।
क्या अभिभावकों को लगेगा कि शिक्षक अब कॉपी नहीं जाँचते?
उल्टा होता है। हर नंबर आपका ही रहता है, और घर तक हर सवाल पर लिखा हुआ फ़ीडबैक पहुँचता है — जो दो सौ कॉपियों के लिए हाथ से लिखना किसी के बस की बात नहीं। अभिभावक जाँच कम नहीं, ज़्यादा देखते हैं।
बच्चों की कॉपियाँ कहाँ जाती हैं?
सिर्फ़ आपके संस्थान के भीतर। न कहीं साझा, न कभी बेची जातीं, न किसी मॉडल को सिखाने में इस्तेमाल। चेकिंग के बाद हटा दी जाती हैं। विस्तार से प्राइवेसी पॉलिसी में।
ख़र्च कितना आएगा?
पहला पेपर मुफ़्त — आपके अपने बच्चों की लिखावट पर, कुछ तय करने से पहले। उसके बाद जितने पन्ने चेक हों उस हिसाब से, हर महीने, न सेटअप फ़ीस न बंधन। पूरी जानकारी यहाँ।
यह काम कैसे करता है?
पन्ने की फ़ोटो से अक्षर पढ़ना, सवाल की माँग समझना, उत्तर को स्कीम से मिलाना और यक़ीन न होने पर शिक्षक को लौटाना — चार अलग काम हैं, और चारों अलग तरीक़े से ग़लत होते हैं। विस्तार से यहाँ पढ़िए, ख़ास तौर पर वह हिस्सा जहाँ इस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
अपने ही एक पेपर पर आज़माकर देखिए।
ऐसा टेस्ट भेजिए जो आप पहले ही जाँच चुके हैं। हमारे नंबर आपके नंबरों के साथ रखकर देखिए। पहला पेपर मुफ़्त है।
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